फिर चाँद...
कल रात की बात है
रात बस रात थी
चाँद में था चाँद
शुभ्र शीतल चाँदनी
हवा खुशगवार
बिजली कटी थी
बस चाँदनी थी
दुनिया हसीं थी
गुम तल्खियाँ थीं
गुम सारे संशय
संकट भी चुप थे
दिन के उजाले
लेकर भले आएँ
चिंताएँ सारी
और जिक्र सारे
हर घटी में है जीवन
है हर पल-विपल में
अहर्निश अहोरात्र घटित हो रहा है
क्षण भर में भंगुर, बस इतनी कथा है
ईरान इजरायल गाजा फिलिस्तीन
अमरीका यूक्रेन क्या रूस क्या चीन
सभी जानते हैं, नहीं कुछ है हासिल
एक दिन जहां से वे चल देंगे उठकर
जहां है तभी तक, है जाँ बाकी जबतक
किसके लिए है ये है किसकी खातिर
बहुत दूर यह जंग नहीं है किसी से
आ पहुँचे क्या जाने क्या भेस धर कर
वैसे तो इन्साँ होता है दो-चार
रोज अपनी जंग से, जद्दोजहद से
डूबा दु:खों में , घिरा मुश्किलों में
फिर असलहे और ये हमले हैं क्योंकर...
कल रात
रात बस रात थी
चाँद सिर्फ चाँद
चाँदनी शुभ्र शीतल
हवा खुशगवार
उम्मीद को मरने नहीं देना है
कम- से- कम इतना तो करना है...
कलाएँ चाँद की
इस चाँद को हम
क्या नाम दें...
इस चाँद को हम
कुछ काम दें ...
बेखुदी,ये बेखयाली, बेकली,बेचारगी
और तसल्ली, और तवक्को,रूप और फिर सादगी
चाँद की हैं सब कलाएँ, मान लें
आराम दें
दिल को जी आराम दें !
छवियाँ चाँद की
(१)
चाँद खुब गया है
रात ने कहा है
मन समझ रहा है...!
फोटो पर चाँद की
हो तो हो
चाँद पर कॉपीराइट
किसका है कहो
(२)
चाँद की कला है
उफ् ! क्या बला है
हर जाँ मुब्तिला है
हर दम मुब्तिला है
ग़मे-रोज़गार में ...
(३)
पूरा हो आधा हो
चमका हो सादा हो
हरेक रंगरूप में
चाँद लुभाता है
आदमी ही उससे कुछ
सीख नहीं पाता है
(४)
शाखों पर अटका हो
या मन में भटका हो
लेकिन जब टटका हो
बिजलियाँ गिराता है
चाँद जहाँ आता है
मन एक तारा
निपट काले आसमान में
बिंदु-सम
तारा चमक रहा है
वह कितना बड़ा है ?
अतिदूरस्थ तारा अपनी
उपस्थिति-मात्र से
अँधेरे को जीतने नहीं देता
उसका बड़प्पन इसी एक बात में है
निकटतर सूर्य और चन्द्रमा कई बार
चूक जाते हैं, चुक जाते हैं समयपूर्व
जीवन के कठिन, अँधेरे क्षणों में
किसी की उपस्थिति का भान भी
बचा ले जाता है जीवन
संशय के मेघों से आच्छादित
न होने दें मन को
निरभ्र आकाश में ही टिमटिमाते-चमकते दिखते हैं तारे
नि:संशय स्थिर चित्त ही देख सकता है
किसी के मन की चमक !
चारागर
जरा शांत बैठिए
चाँद देख रहा है
नीम उजाला है
रात शबाब पर है
दिल में है सुकून...
रह गईं सो रह गईं
सब हसरतें तमाम
धुल रहे हैं दाग दिल के...
चाँदनी मरहम है





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