सोमवार, 27 अप्रैल 2026

साधो, जग बदलेगा !

 

  साधो, जग बदलेगा !

 

साधो,  जग  बदला  है,  देखो

तुम भी खुद को बदलो, साधो

 

सबकी  सारी  बातें   सुन  लो

अपनी मन में रख  लो,  साधो

 

चाहो, जीवन  गिरवी  रख  दो

चाहो, जीवन  चख लो, साधो

 

चाहे   अपनी    आँखें    मूँदो

तुम चाहे सब लख लो, साधो

 

गति दुनिया  की  क्या बदलेगी

तुम कितना भी झख लो, साधो

 

जग  की  बातें  जग  पर  छोड़ो

तुम बस अपना हक लो, साधो

 

किसको  क्या ही  गरज पड़ी है

जो  मन  चाहे  बक  लो, साधो

 

चाल- कुचाल  सभी  दिख जाते

चाहे  कितना   ढँक  लो,  साधो

 

मन  मिलने  से  हल  मिलता है

वरना  जितना  मथ  लो,  साधो           

 

          (२)

 

अपना अन्तर बदलो साधो

बदलेगा जग, जग बदलेगा

जो चाहो, बस देखो उसको

बदलेगा जग, जग बदलेगा

 

औरों  की  चिंता  छोड़ो   तुम

अब भीतर को  मुख मोड़ो तुम

खुद की खातिर बदलो खुद को  

बदलेगा जग, जग बदलेगा

 

ना घातों में, ना मातों  में

बस छोटी-छोटी बातों में

प्रेम फलित कर देखो तब तो

बदलेगा जग, जग बदलेगा         

                                             छंद – ३


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