शनिवार, 18 अप्रैल 2026

सुनिए सुनी-सुनाई

 


सुनिए सुनी-सुनाई

 

खाली  तो ढन-ढन  ढनकाए
अधजल गगरी छलकत जाए
भरी    गिरा    गंभीर   सुनाए

आँगन   टेढ़ा   नाच    आए
कुछ का कुछ  समझाए  जाए
खाली   अपनी  ही  चमकाए  

मौके   पर   सबकुछ  बिसराए
समय चुके फिर क्या  पछताए
बस  बातों  ही  जनम  बिताए

पानी   जितना   भले   पटाए
अपने   मन   से  पेड़  फलाए
सबर    करे  मीठा  फल पाए 

आँख में उँगली डाल दिखाए
फिर भी कोई  समझ   पाए
भैंस  के  आगे  बीन   बजाए      

सच इस जुग में आँख झुकाए
सच  है   साधो   जग  बौराए
झूठे   को    दुनिया  पतियाए          
 
कोयल   मीठे   गीत   सुनाए
मौसम   कितने  रूप  दिखाए
गया  समय  न लौट  के आए
 
जो  बल  पाए सो  बलखाए
निर्बल का कहो कौन सहाय
समरथ को सब मिलता जाए
 
मन   से   हारा    हारे  जाए
जो  मन जीते वो  जग  पाए
जीते  को   दुनिया  अपनाए
 
बीती   बातों   को   बिसराए
जो  आगे  की  सुध ले  पाए
सहज  सफल जीवन हो जाए

                                        २०२३-२४/ छंद-१


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