नामाक्षरी
ज ग में जो प्यारा
हो
ग रज कि तुम्हारा
हो
न् यारा हो, दुलारा हो
ना हर तुम,दुनिया ये
थ ल-थाना
थारा हो
***
सं कल्प सारे पूरित
दी पित सारी खुशियाँ
हों
प् यार जग से खूब
मिले
त रक्कियाँ कदमों
में हों
***
ज य जय बी एन
मिश्रा
य क यक दिन इक
मिसरा
ज ग-जीवन का
हर छिन
य म-नियम ढले
हों दिन
बी न रखीं
हों खुशियाँ
‘एन रूट’
मन- गलियाँ
मि ताई भलाई से
श्रा वण बरखा
जैसे
***
रा ह अपनी चले चले
जे ठाई पकड़े
चले
श हाना अंदाज़
धरे
***
र वि-सा रवि
का रोशन रहे
नाम
वि शद विहंगम
रहें सारे काम
कु शल कुशाग्र
प्रवर प्रखर साकार
मा र्जन- अर्जन-
लाभ- यश- प्राकार
र
चित-रमित-भरित-जड़ित टीमटाम
***
बि ताइए जिन्दगी
रंग में
नी र-क्षीर जो मिले
संग में
श हद मन का सदा
बचा रहे
***
प्र काश का हो मण्डल
का यल जग, मन उज्ज्वल
श बो-रोज़ रंग जमता
रहे
***
सु र्ख़रू हों
मी र-ए-कारवाँ भी
रहें
त हे-दिल की
ख़्वाहिशों का तर्जुमा यही है
***
चि रनवीन
रं जन-प्रवीण
जी वन अनुशासन
व य-कुमोद नित
प्रफुलित
***
म न का ही पाइए
नो श फ़रमाइए
ज श्न हो ज़िन्दगी, रोज़ की बात हो
***
दि ल की कली रहे
खिली
ने ह के बँधे रहें
फीते
श रबती लगती रहें
बातें
***
दी खें दूर-दूर से
पे श्तर से भी पहले
श ख्सियत के रंग
तुम्हारे छाए इस जहान में
***
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