मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

नामाक्षरी

नामाक्षरी 


 

ग में जो प्यारा हो

रज कि तुम्हारा हो

न्‍ यारा हो, दुलारा हो

ना हर तुम,दुनिया ये

ल-थाना थारा  हो

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सं कल्प सारे पूरित

दी पित सारी खुशियाँ हों

प्‍ यार जग से खूब मिले

रक्कियाँ कदमों में हों

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य जय      बी  एन  मिश्रा

क यक  दिन  इक मिसरा

ग-जीवन   का  हर  छिन

म-नियम   ढले  हों   दिन

बी     रखीं    हों  खुशियाँ

एन रूट       मन- गलियाँ

मि ताई        भलाई       से

श्रा वण        बरखा    जैसे

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रा ह अपनी चले चले

जे ठाई   पकड़े   चले

हाना  अंदाज़   धरे

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वि-सा  रवि  का  रोशन  रहे   नाम

वि शद   विहंगम    रहें   सारे   काम

कु शल  कुशाग्र  प्रवर  प्रखर साकार

मा र्जन- अर्जन- लाभ- यश- प्राकार

चित-रमित-भरित-जड़ित टीमटाम

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बि ताइए जिन्दगी रंग में

नी र-क्षीर जो मिले संग में

हद मन का सदा बचा रहे

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प्र काश का हो मण्डल

का यल जग, मन उज्ज्वल

बो-रोज़ रंग जमता रहे

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सु र्ख़रू हों

मी र-ए-कारवाँ भी रहें

हे-दिल की ख़्वाहिशों का तर्जुमा यही है

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चि रनवीन

रं जन-प्रवीण

जी वन अनुशासन

य-कुमोद नित प्रफुलित

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न का ही पाइए

नो श फ़रमाइए

श्न हो ज़िन्दगी, रोज़ की बात हो

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दि ल की कली रहे खिली

ने ह के बँधे रहें फीते

रबती लगती रहें बातें

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दी खें दूर-दूर से

पे श्तर से भी पहले

ख्सियत के रंग तुम्हारे छाए इस जहान में

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