मंगलवार, 21 अप्रैल 2026

मन मेरे तू धीरज धर

 


मन मेरे तू धीरज धर

 

जब  घोर  निराशा  तारी हो

जब तम का पलड़ा भारी हो

जब दुख का जलवा जारी हो

तब मन मेरे, तू धीरज धर

 

जब कदम-कदम दुश्वारी हो

जब  हर सू  दुनियादारी  हो

जब  सबके  पीछे  बारी  हो

तब मन मेरे, तू धीरज धर

 

जब ऐसी ही लाचारी हो

हर तरकारी सरकारी हो

जब सबकी मति ही मारी हो

तब मन मेरे, तू धीरज धर

 

मिहनत से अपनी  यारी हो

जब  अपनी भी  तैयारी हो

जब बाकी अपनी  बारी हो

तब मन मेरे, तू धीरज धर

                                   छंद-२


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