मन मेरे तू धीरज धर
जब घोर निराशा तारी
हो
जब तम का पलड़ा भारी हो
जब दुख का जलवा जारी हो
तब मन मेरे, तू धीरज धर
जब कदम-कदम दुश्वारी हो
जब हर सू दुनियादारी हो
जब सबके पीछे बारी
हो
तब मन मेरे, तू धीरज धर
जब ऐसी ही लाचारी हो
हर तरकारी सरकारी हो
जब सबकी मति ही मारी हो
तब मन मेरे, तू धीरज धर
मिहनत से अपनी यारी हो
जब अपनी भी तैयारी हो
जब बाकी अपनी बारी हो
तब मन मेरे, तू धीरज धर
छंद-२
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