रविवार, 3 मई 2026

फिर कही बात ...2

 फिर कही बात ...2


मन को तुम्हारे टटोले हुए हैं

अब आँखें अपनी खोले हुए हैं


रात और दिन का फ़र्क कुछ नहीं

करेंगे वही जो बोले हुए हैं


कल तक वही थे आँखों के सपने  

जो आज दिल के फफोले हुए हैं


मन मे ज़हर ही ज़हर घुल रहा है

रस बातों कैसा घोले हुए हैं


माना तुम्हीं-तुम बड़े हो गए हो

माना कि बस हम मँझोले हुए हैं  


चिंताएँ कितनी ठूॅंसी हुई हैं

इंसान हैं याकि झोले हुए हैं


मन था- नज़रों में ऊॅंचा उठेंगे 

वे कि तराजू में तौले हुए हैं


लगता है कि हम चूके यहीं पर

हमीं भेद सारे खोले हुए हैं


+++


ऊब न जाओ डरता हूँ 

कितनी बातें करता हूँ 


तुम भी अच्छे लगते हो

तुम पर भी मैं मरता हूँ 


उनको दिक्कत है ,मैं ही

खतो-किताबत करता हूँ 


दिन भर खाली बैठा हूँ 

दिन भर आहें भरता हूँ 


सोच-समझ कर कहते हैं

मैं कह, सोचा करता हूँ 


+++


बस बाल-बाल बचे हैं

बुझे हुए अगरचे हैं


किस्से सभी मेरे हैं

जाने किसने रचे हैं


सब बॅंधे-से बैठे हैं

खूबरुओं के चर्चे हैं


खुल के बोलनेवाले 

अब भला किसे पचे हैं

गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

फिर कही बात...

फिर कही बात... 

(कुछ छंद में बतर्ज़े-ग़ज़ल )



मुद्दा  तो   समीचीन   है

इधर पाक, उधर चीन है


धुन वही आप ही की है

जी, आपकी ही बीन  है


गौर से सुनिए ज़रा फिर

अगर बात कुछ महीन है


बेफिक्र  हो  ले जाइए

दिल चीज़ बेहतरीन है


चाहा कि दिल हाथ आता

आ    जाता   आस्तीन   है


तुम्हारा ही है  आसमाँ 

मुझे  ढूॅंढ़नी  ज़मीन  है


आँख बही जाती है बस

और दिल तमाशबीन है


हाल इसका भी पूछ लो 

कि ज़ख्म ताज़ातरीन है


***


कोई  दोस्त  जब   दुश्मन   लगे

फिर बुझा-बुझा-सा ये मन लगे


एक हल्के-से झोंके से भी

कभी यूँ टूटता बंधन लगे


कितने   सुहाने   थे   पल   मेरे

अब सोचूँ अगर तो सपन लगे


***


कुछ भी करने को  तैयार  हूँ 

जी हाँ, मैं बिल्कुल बेकार हूँ 


जो खुद ही  डूबा  चाहता है 

एक ऐसा अजब मँझधार हूँ 


कहना तो तुमसे चाहता  हूँ 

तुम्हारा,देख लो, मैं प्यार हूँ 


कांटों में अगर एक खार हूँ 

तो गुलों में उनका क़रार हूं


अब तो कुछ करना ही पड़ेगा

यहाँ  बहुतों  का  एतबार   हूँ


तुमको सुना-सुना कर हाल सब

अब   हल्का-हल्का-सा  यार हूँ 


***


बुधवार, 29 अप्रैल 2026

श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि


चले गए इरफ़ान !

    [ 29.04.2020 ]

 

चले गए इरफ़ान !

 

साथ ले गए 

कुछ

अंत:करण का 

 

भर गए

रह गई खाली जगह को

एक भींगी हुई-सी भावना से

 

साधारण को

जो

असाधारण कर देती है

उस संभावना से !!

 

यहीं तो हैं ऋषि कपूर

    [ 30.04.2020 ]

 प्रेम

अमर होता है

मासूमियत शाश्वत

 

पुर-ज़ोर

हुआ जा सकता है

पुर-शोर

हुए बिना

 

अच्छा होना किसी का

बना रह सकता है...

बचा गए

कितने-कितने दिलों में यह भरोसा

 

चले तो गए हैं

मगर 

यहीं तो हैं

ऋषि कपूर !!

 

मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

नामाक्षरी

नामाक्षरी 


 

ग में जो प्यारा हो

रज कि तुम्हारा हो

न्‍ यारा हो, दुलारा हो

ना हर तुम,दुनिया ये

ल-थाना थारा  हो

***

सं कल्प सारे पूरित

दी पित सारी खुशियाँ हों

प्‍ यार जग से खूब मिले

रक्कियाँ कदमों में हों

***

य जय      बी  एन  मिश्रा

क यक  दिन  इक मिसरा

ग-जीवन   का  हर  छिन

म-नियम   ढले  हों   दिन

बी     रखीं    हों  खुशियाँ

एन रूट       मन- गलियाँ

मि ताई        भलाई       से

श्रा वण        बरखा    जैसे

***

रा ह अपनी चले चले

जे ठाई   पकड़े   चले

हाना  अंदाज़   धरे

***

वि-सा  रवि  का  रोशन  रहे   नाम

वि शद   विहंगम    रहें   सारे   काम

कु शल  कुशाग्र  प्रवर  प्रखर साकार

मा र्जन- अर्जन- लाभ- यश- प्राकार

चित-रमित-भरित-जड़ित टीमटाम

***

बि ताइए जिन्दगी रंग में

नी र-क्षीर जो मिले संग में

हद मन का सदा बचा रहे

***

 

प्र काश का हो मण्डल

का यल जग, मन उज्ज्वल

बो-रोज़ रंग जमता रहे

***

सु र्ख़रू हों

मी र-ए-कारवाँ भी रहें

हे-दिल की ख़्वाहिशों का तर्जुमा यही है

***

 

चि रनवीन

रं जन-प्रवीण

जी वन अनुशासन

य-कुमोद नित प्रफुलित

***

 

न का ही पाइए

नो श फ़रमाइए

श्न हो ज़िन्दगी, रोज़ की बात हो

***

 

दि ल की कली रहे खिली

ने ह के बँधे रहें फीते

रबती लगती रहें बातें

***

 

दी खें दूर-दूर से

पे श्तर से भी पहले

ख्सियत के रंग तुम्हारे छाए इस जहान में

***

 

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

साधो, जग बदलेगा !

 

  साधो, जग बदलेगा !

 

साधो,  जग  बदला  है,  देखो

तुम भी खुद को बदलो, साधो

 

सबकी  सारी  बातें   सुन  लो

अपनी मन में रख  लो,  साधो

 

चाहो, जीवन  गिरवी  रख  दो

चाहो, जीवन  चख लो, साधो

 

चाहे   अपनी    आँखें    मूँदो

तुम चाहे सब लख लो, साधो

 

गति दुनिया  की  क्या बदलेगी

तुम कितना भी झख लो, साधो

 

जग  की  बातें  जग  पर  छोड़ो

तुम बस अपना हक लो, साधो

 

किसको  क्या ही  गरज पड़ी है

जो  मन  चाहे  बक  लो, साधो

 

चाल- कुचाल  सभी  दिख जाते

चाहे  कितना   ढँक  लो,  साधो

 

मन  मिलने  से  हल  मिलता है

वरना  जितना  मथ  लो,  साधो           

 

          (२)

 

अपना अन्तर बदलो साधो

बदलेगा जग, जग बदलेगा

जो चाहो, बस देखो उसको

बदलेगा जग, जग बदलेगा

 

औरों  की  चिंता  छोड़ो   तुम

अब भीतर को  मुख मोड़ो तुम

खुद की खातिर बदलो खुद को  

बदलेगा जग, जग बदलेगा

 

ना घातों में, ना मातों  में

बस छोटी-छोटी बातों में

प्रेम फलित कर देखो तब तो

बदलेगा जग, जग बदलेगा         

                                             छंद – ३