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रविवार, 31 मई 2026

हँसोतले चलीं...

 

हँसोतले चलीं...

 

काल्हे एगो कविता लिखाइल रहे “ हँसोत लीं” । लेकिन लागता बात पूरा नइखे भइल । त कुछ औरि बात कइल जाव।

आज के जुग में हँसोतला से कोनो के फुरसते नइखे । ई सहियो बा बात । जे सौंसे दुनिया पगलाइल बा, त एक आदमी के कहला अ चहला से का होई ? अकेला चना कब्बो भाँड़ फोड़ेला का !

रउआ देखीं कि इ दुनिया में कुछो नइखे धरल हँसोतला के अलावा।

कवनो औफिस में जाईं । सौ में निनानबे चांस बा कि उहे काम करावे खातिर रउआ के चढ़ावा चढ़ावल परी जेकरा खातिर उ आदमी के वेतन मिलेला । उ कही कि उ अपने खर्चा-पानी दिहला के बाद पोस्टिंग करौले बा । पूरा सिस्टम बनल बा। रउआ बीच में पिन ना मारीं ।

जाईं, इसकूल चल जाईं । एक से एक फैसनेबल इसकूल । पढ़ाई के मतलब का इ रंगबिरंगा डरेस, टाई-फाई, कम- से-कम दू तरे के जुत्ता होला ? फीस के बात त छोड़िए दीं । का होखता; बच्चा अ बच्चा के माय-बाप के सपना बेचल जाता । बिना कवनो गैरेंटी के । बात हिहवेँ नइखे रुकत । दुनिया भर के कोचिंग खोल लेले बाड़ऽ सन । बच्चा-कलास से ले के यूपीएससी के तैयारी खातिर तक ले । का हम नइखी जानत कि ई सब खेला खाली भावना के साथ खिलवाड़ ह । लोग के हँसोते के बा, खलिया हँसोते के बा ! ना त बताईं , सरकार शिक्षा पर कतना खरचा करेली ! मास्टर औरि पोरफेसर लोगिन कलसवा में मन लगा के पढ़ावत होखतें त का बच्चा लोग ना पढ़ीत ? शिक्षा व्यवस्था में जेतना गैप बन गइल बा, कोचिंग के व्यवस्था ना होखित  त पूरा व्यवस्था बैठ गइल होखित । कोचिंग के सपोर्ट सिस्टम के रोल रहे, सरकारन के उदासीन रहला से पूरा सिस्टमे बन गइल बा ।अब त अइसन माहौल बन गइल बा कि जे कोचिंग ना जाई ओकर कंफिडेन्‍स गड़बड़ा जाई । बच्चा त बच्चा गार्जियन लोग के भी ।

चल जाईं बैंक । हो सकेला कि सीधासाधी लेनदेन के बात ना होखो । लेकिन एतना तरे के चीज बेचे लागिह सन – हइ इंसोरेंस, त हउ इंसोरेंस, मुचुअल फंड, ई कार्ड त ऊ कार्ड । कतना चीज के मना कर पाइ लोग ? वइसेहु आपन काम फँसल रहेला त लोग सही-गलत डिमांड मान लेवेला । का बैंक के  हँसोतल ना ह ई ?

हमनी खुद आपन बेवहार के तनि ठीक से देखीं त अपनो हँसोतल दिखाई दी । सामान जमा करे के लत हमनी में नइखे का? बजार जानेला हमनी के पाकिट से माल झारल । बड़-बड़ स्टोर में हर चीज के बड़-बड़ पैकेट दिखाई दी । देखादेखी, बड़ आदमी दिखे के चाह में हम बिना सोचले उठा लेवेनी । ई दुतरफा हँसोतल बा । एक तरफ त हम जरुरत से ज्यादा सामान खरीदनीं, दूसर तरफ उ कम्पनी ज्यादा माल बेच ली । कहीं- कहीं इहो देखल जाला कि सामान सड़ जावे त सड़ जावे , कवनो के दिलाई ना । लोग के ई हाल हो गईल बा कि जे सब कुछ खवला पार ना लागि त कम-से-कम जुठाइए के छोड़ल जाए !  लोग के नजर एकदम से एकदम खाली अपना पर गड़ल बा ।

हम साहित्‍त के बड़ी पाक-साफ बूझत रहनी । राजनीति के मशाल, अंतरात्मा के अवाज । सब ढकोसला बा जादातर । इहवाँ हँसोतला के अलगे डिजाइन बा । जेतना नाम-धाम बा, जेतना पुरस्कार-उरस्कार बा, सब कुछे लोग के मिलल चाही । एतना ऊँचा कुरसी पर बइठ के बतियावे ला लोग कि उनका देखे ही में गरदन दुखा जाइ । जे बोलिहऽ सन सब परम सत्यहोई , एकदम नम्बर एक !  भले ही भीतर खाली होखे, बहरि हाउसफुल के ही बोर्ड लगावल जाला । हिन्‍दी में कहल जाला न अनधिकार प्रवेश निषेधऔरि प्रवेश सिर्फ आमंत्रण द्वारा। एगो जिमखाना कलब के किस्सा आजकल चलतो बा !

हम त कहेनीं जल्दी-जल्दी हँसोतल सीख लीहीं । दुनो हाथन से । मन से एकदम मान लीं कि आज के इहे रीत बा । रीत निभावल चाही । ई में बहुत लोग सुखी रही । आजकल मन के शान्ति बड़ी जरूरी बा । ई एथिक-फेथिक, साँच-झूठ, जुलुम-अपराध आदि इतादि किताब में पढ़ल ठीक बा, जिनगी में उतरला से कष्‍ट हो जाई ।

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 [भोजपुरी मुझे कितनी आती है, कह नहीं सकता । बचपन में बिहार के कई जिलों में रहने का मौका मिला तो हर जगह की कुछ चीजें साथ रह गईं  भोजपुरी के साथ ऐसा हुआ कि इसके बिना काम नहीं चलना था । ऐसा कह सकते हैं कि भोजपुरी में ही मैं अपने रंग में आया । बेतियामें गुजरे चार साल ही जीवन का आधार बने हुए हैं । भोजपुरी उनमें से एक है । अत: भोजपुरी में अभिव्यक्ति की इच्छा स्वाभाविक है, कितनी सधी हुई है, पता नहीं । ]


शनिवार, 30 मई 2026

हँसोत लीं...

 

 हँसोत लीं...

 

हँसोत  लीं,  हँसोत  लीं

भर  जिनगी  हँसोत  लीं

 

करल-धरल,   होई  का

लरल-भिरल,  होई  का

थरिया बा भरल  रखल

भकोस लीं, भकोस लीं

 

रउआ   के    सोहें   जें

रउआ   के    मोहें   जें 

उनका   ना,  बाकी  के

बकोट लीं, बकोट  लीं

 

सब  जे  बा   रउए   के

होखी    जे    रउए   के

अँधार  सब  जहान  के

रउआ  सब  इजोत  लीं

 

आपन  लाभ- लोभ  से

डिगीं  तनिक न छोभ से

 मन  के सुनीं औरि न

मन  में  तनि कचोट लीं

 

बाँटल  बा   बात   बुरा

सवारथ    तेज   छुरा

छुरवे    के    तेजी    से

खसोट लीं,  खसोट लीं

 

हाँ, सीधा  जन  के मुँह

चाटेला     कुत्तवो    नु

सीधापन   के   जल  में

खुद के खुद न  बोथ लीं


मंगलवार, 24 मार्च 2026

चैता/ चैती की तर्ज पर

 

चैता/ चैती की तर्ज पर

 

    (१)

चैत के महिनवा हे रामा

कइसे बीते दिनवा , माने नहि मनवा

माने नहि मनवा हे रामा

करे का जतनवा


साँझ परत रोवत

दिने-दिन ही खोवत

सोचत रहत काहे  न निकसे परनवा

न निकसे परनवा हे रामा

चैत के महिनवा

 

करत रहत काहे

जे मन ना चाहे

दौरत भागत का जोरे तु समनवा

जोरे तु समनवा हे रामा

चैत के महिनवा

 

    (२)

 

बीतें जल्दी दिनवा हे रामा

कि लागे नाहि मनवा

 

देस-बिदेस के छूटल ठिकनवा

का होइ काहे बिचलित परनवा

रामे भरोसे, रामे सहारे सब जिए के समनवा

सब जिए के समनवा हे रामा

बीते जल्दी दिनवा

 

रोग-बियोग से बचें सब कइसे

बँध-बँध के कुछो रचें अब कइसे

रामे कराए, रामे बचाए सबे राते दिनवा

सबे राते दिनवा हे रामा

कि लागे नाहि मनवा

 

भोर भइल जेहि टूटल सपनवा

साँझ परत सेहि खोजे उ मनवा

रामे दिखाए, रामे पुराए का सोचे के करनवा

का सोचे के करनवा हे रामा

का सोचे के करनवा

 

पंछी डोलें, बोले कोयलिया

सूना परल सब सहर के गलियाँ

रामे भराए, खाली कराए फिर भरे रे अँगनवा

फिर भरे रे अँगनवा हे रामा

भरे रे अँगनवा

 

     (३)

 

कौनो जुगत से, कौनो जतन से

जिया नहीं माने हे रामा

जिया नहीं माने

 

झूठ बने सच, सच बने झूठा

ई दुनिया के रीत अनूठा

करे सब बहाने हे रामा

जिया नहीं माने

 

एक दूसर के केहू न माने

अपनेहू के भी तो ना जाने

खुदे के बखाने हे रामा

जिया नहीं माने

 

नियम तोड़ें उ करें मनमानी

समझें अपना के ढेरे ज्ञानी

मूढ़े के माने हे रामा

जिया नहीं माने

 

जे आँधर बनें मोह के मारे

भल मोह से के उनका उबारे  

के बिधि उपराने हे रामा

जिया नहीं माने

 

     (४)

 

कोयलिया गावऽ तिया

भरल रतिया हे रामा

कोयलियाऽ

मनवा पिरावऽ तिया

कोयलियाऽ  हे रामा

भरल रतिया

 

का दुख बा दुनिया के गा गा

सुनावऽ तिया हे रामा

भरल रतिया

 

का से का जे छूटल, दुखवा

जगाव तिया हे रामा

भरल रतिया

 

हम ना रहनी कोई, हमरा

बतावऽ तिया हे रामा

भरल रतिया

 

फाँक रहे जे भितरे, हमरा

दिखावऽ तिया हे रामा

भरल रतिया

 

सगरे सब पइसा के खेला

जनावऽ तिया हे रामा

भरल रतिया                   

             

   (५)

 

चैत मासे सुनीं

बोलेली कोयलिया हे रामा

न जाने न जाने

न जाने मोरा पिया

 

काहे कित छूटल

जे साथी-संघतिया हे रामा

न जाने न जाने

न जाने मोरा जिया

 

बाहर सगरे जे

रँगे रंगे-बिरंगिया हे रामा

न माने न माने

ई मन कारी रतिया

 

दुख होला गाढ़ा

दुख के पातर करिहऽ हे रामा  

पिअला से ना, ना

दुख रहे दुखी छतिया

 

दू दिन रहनीं हम

कि अब चार दिना इहाँ हे रामा

पूछे ना पूछे

हम जानेनीं  बतिया

 

जे साँसे-साँसे

सब जहरे-जहर बा  हे रामा

करे नहीं पुरबा

नहीं करे कुछ पछिया

 

घड़ी बेर बइठल

आती-जाती बेरा हे रामा

न भूले न भूले

न भूले टाटि झरिया                   

 

  (६)

 

भोरे भोर देखीं बोलेली कोयलिया

बोलेली कोयलिया हो रामा

कहाँ आवे निंदिया

 

बिसरायल रहे, रहे

जिनकरे रे निसनिया

जिनकरे रे निसनिया हो रामा

याद उनकरे बतिया

 

धूल परल दरपन सब

लागे धुँधला अँखिया

लागे धुँधला अँखिया हो रामा

काहे अँखिये पनिया

 

जे बीतल बीत गइल

बदले रोजे दुनिया

बदले रोजे दुनिया हो रामा

दुखे न दीहिं कंठिया                     

              

   (७)

 

मत झारऽ टिकोरवा हो रामा

रहे द पेड़वे में

भरल अँखियो में हो रामा

रहे द डेरवे में

 

आँधी आई पानी आई

सँग टिकोरा के सपनो झर जाई

मत तूड़ऽ सपनवा हो रामा

कि सजे द घरवे में

 

घेरवा टूटी डेरवा छूटी

मोह के सगरे धागा टूटी

कि बाँधीं एगो धगिया हो रामा

मने के पेड़वे में                            

               

         (८)

 

दुख साथी बा दुख बा नाता

दुख भर जीवन के बा जाँता

जाँतीं न मनवा हे रामा

दुख जीवन बा

जाँती न मनवा हे रामा

सुख ना कम बा

 

जे आई कि जाई जरूरे

मूरख होई से मगरूरे

राखीं नत मनवा हे रामा

सत् जीवन बा

 

हँसत-खेलत रे जिए जे भाई

जीवन से जे करे ना ढिठाई

राखे पत मनवा हे रामा

मत जीवन बा

 

आज बानी कल जानि होई का

अपने पर रखीं खाली भरोसा

जोर रहे मनवा हे रामा

व्रत जीवन बा

 

    (९)

 

चैत के महीनवा में

देह के दरदवा

मन के दरदवा से

कम नइखे रामा

 

के ले के जाई हमरा

के ले के आई हो

मन ओझरायल, कोनो

कम नइखे रामा

 

नीमवा के फलवा से

खूनवा त होला साफ

मनवा के साफ करी

तम नइखे रामा

 

दूसरा के का कहीं

अपने थकल बानी

अपना से होई का

भरम नइखे रामा

 

सोचले त का रहीं

करले त बानी का

मन कठुआइल, कोनो

कम नइखे रामा

 

उमरिया पे मत जा

डगरिया पे मत जा

केहु कहले होइ,

हम नइखे रामा

 

जीते के बा, जीतऽ खुद के

लड़े के बा, लड़ऽ खुद से

औरो कोनो गत के

करम नइखे रामा