चैता/ चैती की तर्ज पर
(१)
चैत के महिनवा हे रामा
कइसे बीते दिनवा , माने नहि मनवा
माने नहि मनवा हे रामा
करे का जतनवा
साँझ परत रोवत
दिने-दिन ही खोवत
सोचत रहत काहे न निकसे परनवा
न निकसे परनवा हे रामा
चैत के महिनवा
करत रहत काहे
जे मन ना चाहे
दौरत भागत का जोरे तु समनवा
जोरे तु समनवा हे रामा
चैत के महिनवा
(२)
बीतें जल्दी दिनवा हे रामा
कि लागे नाहि मनवा
देस-बिदेस के छूटल ठिकनवा
का होइ काहे बिचलित परनवा
रामे भरोसे, रामे सहारे सब जिए के समनवा
सब जिए के समनवा हे रामा
बीते जल्दी दिनवा
रोग-बियोग से बचें सब कइसे
बँध-बँध के कुछो रचें अब कइसे
रामे कराए, रामे बचाए सबे राते दिनवा
सबे राते दिनवा हे रामा
कि लागे नाहि मनवा
भोर भइल जेहि टूटल सपनवा
साँझ परत सेहि खोजे उ मनवा
रामे दिखाए, रामे पुराए का सोचे के करनवा
का सोचे के करनवा हे रामा
का सोचे के करनवा
पंछी डोलें, बोले कोयलिया
सूना परल सब सहर के गलियाँ
रामे भराए, खाली कराए फिर भरे रे अँगनवा
फिर भरे रे अँगनवा हे रामा
भरे रे अँगनवा
(३)
कौनो जुगत से, कौनो जतन से
जिया नहीं माने हे रामा
जिया नहीं माने
झूठ बने सच, सच बने झूठा
ई दुनिया के रीत अनूठा
करे सब बहाने हे रामा
जिया नहीं माने
एक दूसर के केहू न माने
अपनेहू के भी तो ना जाने
खुदे के बखाने हे रामा
जिया नहीं माने
नियम तोड़ें उ करें मनमानी
समझें अपना के ढेरे ज्ञानी
मूढ़े के माने हे रामा
जिया नहीं माने
जे आँधर बनें मोह के मारे
भल मोह से के उनका उबारे
के बिधि उपराने हे रामा
जिया नहीं माने
(४)
कोयलिया गावऽ तिया
भरल रतिया हे रामा
कोयलियाऽ
मनवा पिरावऽ तिया
कोयलियाऽ हे रामा
भरल रतिया
का दुख बा दुनिया के गा गा
सुनावऽ तिया हे रामा
भरल रतिया
का से का जे छूटल, दुखवा
जगावऽ तिया हे
रामा
भरल रतिया
हम ना रहनी कोई, हमरा
बतावऽ तिया हे रामा
भरल रतिया
फाँक रहे जे भितरे, हमरा
दिखावऽ तिया हे रामा
भरल रतिया
सगरे सब पइसा के खेला
जनावऽ तिया हे रामा
भरल रतिया
(५)
चैत मासे सुनीं
बोलेली कोयलिया हे रामा
न जाने न जाने
न जाने मोरा पिया
काहे कित छूटल
जे साथी-संघतिया हे रामा
न जाने न जाने
न जाने मोरा जिया
बाहर सगरे जे
रँगे रंगे-बिरंगिया हे रामा
न माने न माने
ई मन कारी रतिया
दुख होला गाढ़ा
दुख के पातर करिहऽ हे रामा
पिअला से ना, ना
दुख रहे दुखी छतिया
दू दिन रहनीं हम
कि अब चार दिना इहाँ हे रामा
पूछे ना पूछे
हम जानेनीं बतिया
जे साँसे-साँसे
सब जहरे-जहर बा हे रामा
करे नहीं पुरबा
नहीं करे कुछ पछिया
घड़ी बेर बइठल
आती-जाती बेरा हे रामा
न भूले न भूले
न भूले ‘टाटि
झरिया’
(६)
भोरे भोर देखीं बोलेली कोयलिया
बोलेली कोयलिया हो रामा
कहाँ आवे निंदिया
बिसरायल रहे, रहे
जिनकरे रे निसनिया
जिनकरे रे निसनिया हो रामा
याद उनकरे बतिया
धूल परल दरपन सब
लागे धुँधला अँखिया
लागे धुँधला अँखिया हो रामा
काहे अँखिये पनिया
जे बीतल बीत गइल
बदले रोजे दुनिया
बदले रोजे दुनिया हो रामा
दुखे न दीहिं कंठिया
(७)
मत झारऽ टिकोरवा हो रामा
रहे द पेड़वे में
भरल अँखियो में हो रामा
रहे द डेरवे में
आँधी आई पानी आई
सँग टिकोरा के सपनो झर जाई
मत तूड़ऽ सपनवा हो रामा
कि सजे द घरवे में
घेरवा टूटी डेरवा छूटी
मोह के सगरे धागा टूटी
कि बाँधीं एगो धगिया हो रामा
मने के पेड़वे में
(८)
दुख साथी बा दुख बा नाता
दुख भर जीवन के बा जाँता
जाँतीं न मनवा हे रामा
दुख जीवन बा
जाँती न मनवा हे रामा
सुख ना कम बा
जे आई कि जाई जरूरे
मूरख होई से मगरूरे
राखीं नत मनवा हे रामा
सत् जीवन बा
हँसत-खेलत रे जिए जे भाई
जीवन से जे करे ना ढिठाई
राखे पत मनवा हे रामा
मत जीवन बा
आज बानी कल जानि होई का
अपने पर रखीं खाली भरोसा
जोर रहे मनवा हे रामा
व्रत जीवन बा
(९)
चैत के महीनवा में
देह के दरदवा
मन के दरदवा से
कम नइखे रामा
के ले के जाई हमरा
के ले के आई हो
मन ओझरायल, कोनो
कम नइखे रामा
नीमवा के फलवा से
खूनवा त होला साफ
मनवा के साफ करी
तम नइखे रामा
दूसरा के का कहीं
अपने थकल बानी
अपना से होई का
भरम नइखे रामा
सोचले त का रहीं
करले त बानी का
मन कठुआइल, कोनो
कम नइखे रामा
उमरिया पे मत जा
डगरिया पे मत जा
केहु कहले होइ, ऊ
हम नइखे रामा
जीते के बा, जीतऽ खुद के
लड़े के बा, लड़ऽ खुद से
औरो कोनो गत के
करम नइखे रामा
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