कोयल बोली...
(१)
इस कदर खींचती है
कोयल की बोली हुजूर
आदमी
कभी कोयल
रहा होगा
ज़ुरूर ।
(२)
अलस्सुबह
कोयल ने गाया
है
कू उ उ कू उ उ
हस्बे मामूल
याद दिलाया है
तू उ उ तू उ उ
राजा वसंत की
मुनादी है
प्रकृति पर
हो रहा है
रंग-रोगन नया
मन-मीन
तड़फड़ाया है
!
(३)
एक कोयल ने
बचा रखी है उम्मीद --
कूऽऽऽ कूऽऽऽ कूऽऽऽ...
वरना
क्या मैं
और
क्या तू...
(४)
क्यूँउ ,
क्यूँउ, क्यूँउ
पूछती है कोयल
तकरीबन
रोज
इसी वक्त
जो पूछना था
मुझे खुद से
कि
करना था
जो
किया था तय
कोयल
तो बस
याद ही दिला सकती है !
(५)
बत्ती जली छोड़ी
खाना
बनाया न खाया
न की
साफ-सफाई ही
दिल्लगी नहीं
दिल-लगी है
सुबह-सुबह
आज
कोयल भी कह गई है
(६)
लॉकडाउन में कोयल
[१]
कोयल कूकी
भरी दुपहरी
भरी दुपहरी
कोयल कूकी
नित-नित कूकी
जित-तित कूकी
डाल -डाल पर
बैठी, कूकी
और हवा भी
हल्की-हल्की
बैठी खो के
सारी खुनकी
थके-थके-से
कुछ कुत्ते भी
सोए भी हैं
और जगे भी
दुखी-दुखी-सी
दबी-मरी-सी
बिल्ली घूमे
है चुपचुप-सी
बात नहीं है
ये सुख-सुख की
भली नहीं है
इतनी चुप्पी
घर में घुरघुर
कितना आतुर
अकबक जैसे
खा के घुड़की
चार तरफ से
आँखें मूँदी
लड़ते-मरते
लूटा-लूटी
नित-नित कूकी
जित-तित कूकी
भरी दुपहरी
कोयल कूकी
हम चूके हैं
दुनिया चूकी
[२]
कुत्ते की
आँखें पनियाईं
थकी कबूतर की
पाँखें
पस्त कूक कोयल
की
रह-रह टोक रही हैं
कुछ तो सबकुछ
बोलें बातें
कुछ बातें कुछ
ना बोलें
चित पर होती
घातें
रह-रह भोंक रही हैं
आँख-कान को
मूँद-मूँद कर
कूद-कूद के
झूठ-मूठ
अफवाहें
सच्चाई
रह-रह रोक रही हैं
(७)
कोयल
तुम क्यों गाती हो ?
यह समय
नारों का है
प्रतिरोध का है
विचार का है
गाने से भला क्या होगा ?
कूकने
और भौंकने में
फर्क महसूस
नहीं करते हैं लोग
जरूरत ही नहीं
और कभी
पक्ष लेने की बात आई
तो
भौंकना ही
जीत जाएगा , देखना
तुम ही कहो
गाना कहाँ जरूरी है ?
सुनो
कभी
एकदम
सुबह-सवेरे
सुना मेरा गान ?
क्या
मन हुआ नहीं शांत
जरा भी
सारी भागदौड़
थम नहीं गई
जरा देर को
ये जो
दिन भर
झूठ के झमेले में
पड़े रहते हो
क्या पाओगे उससे ?
जाने
कहाँ-कहाँ के
जोड़-तोड़ में फँसे हो
उससे क्या होगा ?
जिस आदमी को
भूक-भौंक के
तुमने कुत्ता बना दिया है
उसी को
बचा ले जाने की
कवायद है
मेरा गान
जिस दिन
मेरा गान भी
कर्कश हो गया
समझ लो
प्रलय आ जाएगी
अरे,
सुधर जाओ
संभल जाओ
सुबह-सवेरे
मेरा गान सुनो
शीतल मंद पवन को
साँसों में भरो
नीम की पत्तियों पर
धूप को फिसलते देखो
मन की
कोमलता को
हो सके
बचा लो !
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