।। श्रीराम ।।
कृपासिंधु हैं राम धनुर्धारी
खेल-खिलौने बनके
जो खुद मिट्टी उनके
भरके हाथों बड़ी कलाकारी
जग के सब दग्ध-हृदय
प्रति उनके न्याय रहे
हैं वे समदर्शी शीतलकारी
शरणागतवत्सल हैं
क्षमाशील संबल हैं
संशय दूर करें, भय में भयहारी
युद्ध टले, हो जब तक
अन्तिम-अन्तिम पल तक
प्रयास सुखदायी जगहितकारी
सुखधाम नाम हैं राम
मन निश्छल निष्काम
कर सकें जो, करें वे तैयारी

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