शनिवार, 4 जुलाई 2026

साधो-माधो-बतकही : ३ हम कौन देस के वासी ?


 

साधो-माधो-बतकही : ३

हम कौन देस के वासी ?

 

साधो, सुने कुछ ?

, कुछ हुआ है क्या, माधो ?

अरे, सरकार कह रही है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रूफ नहीं है ।

तुमहो कहीं विदेश जाना है ?

न ।

तुम्हारे पास पासपोर्ट है क्या ?

न ।

तो काहे के लिए माथा खराब कर रहे हो अपना ? मात्र नौ-साढ़े नौ करोड़ लोग के पास पासपोर्ट है इस देश में । तो बाकी लोग नागरिक नहीं हैं क्या ?

सो, तो है । लेकिन डर लग जाता है न ! बोलता है लोग कि पैन कार्ड, वोटर कार्ड, आधार – कुच्छो प्रूफ नहीं है नागरिकता का।

पैन कार्ड बना हुआ तो खैर बहुत लोग का है, रिटर्न वही नौ करोड़ के आसपास लोग ही भरते हैं । वोटर कार्ड वाला केस सब तो सुन ही रहे होगे । आधार का तो बोल रहे हैं कि खाली पहचान-पत्र है । पासपोर्ट के साइट पर जाकर देखो । लिखा है , भरतीय नागरिकों को जारी किया जाने वाला ट्रैवेल डॉक्यूमेंट । वोटर कार्ड भी तो नागरिक का ही बनेगा । पैन हो सकता है, बिना नागरिक बने भी मिलता हो । कुल मिलाकर हमको तो लगता है कि बात ट्रस्ट डेफिसिटका है ।

ट्रस्ट डेफिसिट’?

अरे भाई, सब लोग जानता है कि यहाँ किसी भी चीज का कोई गारेंटी नहीं है । कुछ का कुछ बनवा लिया जा सकता है यहाँ । सेवा-शुल्क’- आधारित सेवा उपलब्ध हो जाती है । हम मेड इन इंडियाके क्वालिटी पर भरोसा ही नहीं करते। जो भी एक नम्बर चीज होता है, सब एक्स्पोर्ट हो जाता है ।

तो कैसे चलेगा ? सुने कि अपना बर्थ सर्टिफिकेट, अपने माता-पिता का बर्थ सर्टिफिकेट, अपने दादा-दादी का बर्थ सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने के लिए भी बोल सकता है ।

हाँ, अभी वोटर लिस्ट वाला केस में ऐसा हुआ कहीं-कहीं, सुने हैं । हाँ, लेकिन ठीक है । जे होगा, देखल जाएगा । पूरा देश को ही भगा नहीं देगा न ! हाँ, इस बात का डर जरूर है कि पब्लिक पर एक और सेवा-शुल्कका भार बढ़ जाएगा।

बुझा गया, गरीब को देखने वाला कोई नहीं है !