चलिए
कोई बात नहीं है
कुछ
करने को बात नहीं है
चलिए
कोई बात नहीं
है
मन
में जाने क्या- क्या तो है
कहने
को कोई बात नहीं है
मुझसे
कोई काम नहीं है
मुझसे
कोई बात नहीं है
उनसे
मिलना कैसे होगा
देने
को सौगात नहीं है
झूठ-
दिखावे की दुनिया है
अपनी
कुछ औकात नहीं है
बच्चा
भी समझा जाता है
अपने
बस की बात नहीं है
मन
थोड़ा-थोड़ा दुखता है
वैसे
कोई बात नहीं है
बादल
छाए हैं छाने
दो
लेकिन
दिन है रात नहीं है
छंद-११
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें