मंगलवार, 4 अगस्त 2026

कुछ दर्द पुराने होते हैं

कुछ  दर्द  पुराने होते हैं


कुछ  दर्द  पुराने होते हैं

हर शब सिरहाने होते हैं 

    कुछ सुख के खाते भी हमको 

    पहले     तुड़‌वाने    होते     हैं 

कहते-कहते रुक जाने के

अब लाख  बहाने  होते है 

   झाँको मन में तो जानो तुम

   मन  में   तहखाने  होते   हैं 

जब सच हकलाने लगते हैं 

तब  झूठ  सुहाने  होते   हैं 

   कुछ धक्का देने को उद्यत 

   कुछ  खड़े  मुहाने  होते हैं


छंद -९


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें