कुछ दर्द पुराने होते हैं
कुछ दर्द पुराने होते हैं
हर शब सिरहाने होते हैं
कुछ सुख के खाते भी हमको
पहले तुड़वाने होते हैं
कहते-कहते रुक जाने के
अब लाख बहाने होते है
झाँको मन में तो जानो तुम
मन में तहखाने होते हैं
जब सच हकलाने लगते हैं
तब झूठ सुहाने होते हैं
कुछ धक्का देने को उद्यत
कुछ खड़े मुहाने होते हैं
छंद -९
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