गुरुवार, 6 अगस्त 2026

अ से अमिताभ : कथन-उपकथन 32



 

अ से अमिताभ : कथन-उपकथन 32


हवा तेज चलता है दिनकर राव

टोपी संभालो, उड़ जाएगा


अग्निपथ, 1990, निर्देशक : मुकुल एस. आनंद, लेखक : संतोष सरोज, कादर खान


*** 


बारिश थम नहीं रही

प्रश्न भींग चुके हैं

आग फिर भी बरकरार है


खलने वाली 

कुछ रणनीतिक चुप्पियाँ 

अखर जाने वाले

सीनाजोर सवाल कुछ 

डट चुके हैं अपने-अपने मोर्चों पर


मक्खियाँ भिनभिना रहीं हैं 

मवाद पर 

जख्म की दवा

कोई नहीं ला रहा 

दर्द रिस रहा है 


एक-दो बरस नहीं

बरस-बरस की बात है

एक-दो जगह नहीं

यह हर जगह की बात है

सरकारें बदल जाती हैं

दिन बदलते नहीं...


छिद्रयुक्त हो चली है पूरी व्यवस्था

और चरित्र की बात तो खैर जाने ही दें

जिसका जितना हक बनता है

उतना तो दें

जो संदेसा ले के आए

उन-सा ही तो बनना था

वो एक मौका, वो उम्मीद तो मत छीनें


टूटने की कगार पर पहुँच चुका है बाँध 

सुषुप्त ज्वालामुखी भी जाग जा सकते हैं

समय की आवाज को पहचानो

"हवा तेज चलता है दिनकर राव

टोपी संभालो, उड़ जाएगा"

'दिनकर राव' भले ही एक काल्पनिक चरित्र है

यह चेतावनी मगर बिल्कुल ही सही है

यह दु:ख असली है, असली है यह पीड़ा

यह गुस्सा कभी भी क्वथनांक को छू सकता है

यह हवा‌ किसी मामूली आँधी की सूचना नहीं है

यह किसी चक्रवात, किसी बवंडर का संकेत है


हर 'दिनकर राव' को सँभल जाना चाहिए

एक नहीं कई-कई 'विजय' उठ खड़े हुए हैं

कई-कई जगहों से


'विजय' रुका नहीं करते 'अग्निपथ' के सामने...


अब न सँभले, तो फिर

सँभाले नहीं सँभलेगा 

इतिहास रौंद डालेगा


हम कुछ तो समझदार बनें...!





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