शनिवार, 15 अगस्त 2026

जिन्दगी एक नाटक है, हम नाटक में काम करते हैं : २

जिन्दगी एक नाटक है, हम नाटक में काम करते हैं : २ 


पहली बात

फिर रेल का सफर है । बगल वाले भाई जी ने भेज खाना मँगवाया है। खाना देने वाले से पूछा है मांस, मछली, अंडा से टचमेंट नहीं न है । स्टाफ ने जवाब दिया है - नहीं । बात सब ने समझ ली । आपने भी समझ ली होगी । बताइए, लोग हैं कि लगे रहते हैं , शुद्ध भाषा, शुद्ध उच्चारण । शुद्ध संस्कार !!

क्या अंग्रेजी विदेशी मूल की भाषा रह गई है ?

दूसरी बात 

कमजोर आदमी को गुस्सा ज्यादा आता है । कमजोर चाहे देह से हो, पोजीशन से हो, पावर से हो । उससे गुस्सा कंट्रोल नहीं हो पाता । वह मौका तलाशते रहता है गुस्से की निकासी का । इस चक्कर में वह कभी - कभी एक्टिविस्ट, कभी सत्य के रखवाले, कभी व्यवस्था को दुरुस्त बनाए रखने का दबाव बनाने वाला बन जाता है, शिकायतकर्ता बन बैठता है वह । थोड़ा भी ' अपर हैंड ' हुआ नहीं कि उसके भीतर का शेर जाग जाता है ।

गुस्सा अच्छी चीज नहीं है । गुस्से की शुरुआत शिकायत से होती है । शिकायत अच्छी चीज नहीं है। मानता कौन है लेकिन ?

तीसरी बात 

एक समय आता है जब आदमी की नजर कमजोर होने लगती है । नजदीक की चीजें साफ नजर नहीं आतीं । दूर - दूर की दिखती है, दूर - दूर की सूझती है ।

एक समय ऐसा आता है जब सुनने की क्षमता भी कम होने लगती है । किसी - किसी को ज्यादा दिक्कत हो जाती है । लेकिन वैसे लोग भी कुछ खास तरह की बातों को अच्छी-खासी दूरी से और धीमी आवाज में कहे जाने के बाद भी सुन लेते हैं और दूसरे लोगों को चकित कर देते हैं।

एक उम्र आती है जब आदमी के सोच की लोच समाप्तप्राय हो जाती है। जैसे पुराने पेड़ की शाखाएँ। कमाल यह है कि व्यक्ति हर हाल में अपनी ही बात को सही माने बैठा रहता है। जिसको माना तो माना, नहीं माना तो नहीं माना । उसके लिए सच में बीच का रास्ता नहीं होता !

जब आसपास के लोगों में ऐसे लक्षण दिखने लगते हैं, तो कष्ट होता है । मेडिकल कारण तो फिर भी सहे जा सकते हैं, किसी का मन यदि ' टिल्टेड' दिखने लगे तब मुश्किल होती है ।

अपने-अपने सत्य से लोगों को मोह होता है । 

चौथी बात 

आदमी अपनी नजर में हीरो बने रहना चाहता है । होरो बनना सफल होने पर निर्भर करता है । सफल होने के लिए कभी-कभी वह कार्येतर कार्यों को भी कर जाता है । उसके बाद वह चाह कर भी हीरो नहीं बन पाता । पब्लिक चाहे जो समझे ।

पाँचवीं बात

आप अपने दोस्तों से प्रेम करना चाहते हैं । आपके दोस्त आपसे प्रेम करना चाहते हैं । आप अपने दोस्तों के लिए प्रेम जतलाते हैं । आपके दोस्त आपके लिए प्रेम जतलाते हैं । 

दोस्ती और लोकतंत्र की राजनीति में बड़ा साम्य है । 

होता सब है, पर होता कुछ भी नहीं ।

बीच में व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टा, एक्स के कई रेगिस्तान हैं। रेगिस्तान में कभी-कभी नखलिस्तान भी दिख जाते हैं । 

आदमी कठजीव है । जी जाता है ।

छठी बात

हाथी के दो दाँत होते हैं । आदमी के दो स्वभाव। बशीर बद्र साहब ने शायद इसीलिए अपने एक शेर में कहा " परखना मत " ।

ज्यादा देखना । ज्यादा गौर से देखना । ज्यादा गौर करना । आपसी संबंधों के लिए ठीक नहीं । ' यात्री केवल अपने सामान की सुरक्षा के लिए जिम्मेवार हैं ' ! 

सातवीं बात 

मेरे शुभचिंतक मुझे कम मेहनत करने, कम ईमानदारी बरतने, दूसरों के बारे में कम सोचने, कम प्रश्न पूछने आदि के सुझाव देते रहते हैं । वे मुझे समझते हैं और मुझे समझाते हैं कि मुझसे हो नहीं पाएगा।

उनकी बात और है । वे तो बेस्ट हैं । एकदम बेस्टम बेस्ट ! 

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