शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

फिर कही बात ...४

 

फिर कही बात ...४


गलत समय पर सही काम करते हो

बहुत  अपने   को   बदनाम करते हो 


तुम्हारी मुहब्बत का यकीन क्यों हो 

तुम  तो  सबको   सलाम  करते  हो 


आने वाली है इधर बहार मियाँ 

अब देखें क्या इंतजाम करते हो 


दूध  की मक्खी   हो  फेंक देंगे  वो 

बढ़-बढ़ के सबसे कलाम करते हो 


कि कोई भी होता   ऊब ही  जाता

 एक ही बात सुबह-शाम करते हो 


तुम्हारी न तन्हाई है,  तुम   भुगतो

 क्या सबका जीना हराम करते हो