बिहार में कहीं...
साधो-माधो-बतकही
२
साधो भाई, ई परीक्षा सब जो कैंसिल कर देता है, कितना बुरा करता है ?
अपना दिन
भूल गया माधो । तीन साल के कोर्स का पाँच साल में भी पूरा होने का ठिकाना नहीं रहता
था ।
लेकिन वो
तो स्टेट लेवल की बात थी न , अब तो नेशनल
लेवल पर खेला हो रहा है ।
स्टेट से
बात बढ़ेगी तो नेशनल लेवल तक पहुँचेगी ही न । और बोल तो रहे हैं मंत्री जी और हाकिम
लोग कि किसी को बकसा नहीं जाएगा । बख्शा, बख्शा !
माने कि पढ़ना-लिखना
सब बेकार बात है । इससे अच्छा तो लिख लोढ़ा, पढ़ पत्थर होना ही है ।
हाँ । और
ऊ सुने कि नहीं – कॉपी जाँच में भी गड़बड़ी फैला
दिए हैं भाई लोग ?
हाँ, विद्यार्थी होना ही पाप है भाई !
अरे भाई, समय तो कह रहा है कि कोशिश कर के नौवाँ, सतवाँ पास बने रहिए । कुछ न कुछ हो जाएगा ।
हाँ, लेकिन सबके पिताजी लोग का नाम ही तो सेम नहीं है न !!

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें