कुछ छंद में - ५
यादें
कुछ ऐसी बातें होती हैं
पलकें मूँदे जो सोती हैं
यादों के गलियारे में
इक नाम कहीं
से आता है
हल्के से छूके जाता है
लौ जगती अँधियारे में
दिन जीवन के बढ़ जाते
हैं
जब फूल कहीं कढ़ जाते हैं
यादों के उजियारे में
हँसती है कभी
बिगड़ती है
समझो, ऐसे
ही करती है
किस्मत बात इशारे में
***
बचपन की यादें हैं
हमको सहलाती हैं
इस मुश्किल जीवन में
हमको बहलाती हैं
तुम अपने रस्ते पर
हम अपने रस्ते पर
यादें आकर फिर से
हमको मिलवाती हैं
हम अच्छे बच्चे थे
हम अब भी अच्छे हैं
जब भी आती हैं ये
हमको बतलाती हैं
यह झूठी दुनिया है
यह सच है बिल्कुल सच
यादों में आँखें हैं
सच को झुठलाती हैं
अब भी कर सकते हैं
हम ही कर सकते हैं
दुनिया हम बदलेंगे
सपने दिखलाती हैं
मन के घर- आँगन की
खिड़की खुल जाती है
बचपन की गलियों में
यादें बलखाती हैं
छंद -५
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