गुरुवार, 23 जनवरी 2020


शाम की
खिड़की से
डूब गया सूरज
छोड़ परछाइयाँ
गुलाबी-धूसर

यादों के
बक्से में
तहा गया
एक दिन का सफ़ा

किताब ज़िन्दगी की
लिखी जा रही
हर्फ़-ब-हर्फ़ 

गुरुवार, 2 जनवरी 2020


खिल उठती है धूप
सूरजमुखी को देख के
चमकने-दमकने लगते हैं
सूरजमुखी
खिली-खिली धूप में
संक्रामक
हो उठता है
माहौल खुशनुमा...

आओ
चलो
कुछ संक्रामक
करें हम भी
यूँ ही !

भोलाराम जीवित [ भगत -बुतरू सँवाद 2.0]

  भोलाराम जीवित [ भगत - बुतरू सँवाद 2.0] वे भोलाराम जीवित हैं। पहले के जमाने में आपने भी इस तरह के नाम सुने होंगे-- कप्तान, मेजर आदि। जरूरी ...