तरावट
रविवार, 29 जुलाई 2018
कभी ऐसे भी जीतूँ
कि रो पड़ूँ
इतना उठ जाऊँ
कि गिर पड़ूँ सजदे में
दुआ करना
उम्मीदों पर खरा उतरूँ
हर बार
बेहतर से बेहतरीन !
1 टिप्पणी:
राकेश मामोडिया
2 अगस्त 2026 को 10:15 pm बजे
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
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बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
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