तरावट
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बानगी
एक क्लिक की बदौलत !
खास तुम्हारे लिए
विसंवादी
मुदा देख रहा हूँ
धूप तुम्हारे साथ है
तरावट (कविता-संग्रह)
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रविवार, 29 जुलाई 2018
चमकीं आँखें
दमका चेहरा
सद्य-स्वेद-स्नात्
सौंदर्य
सौम्य,सौम्य,सौम्य
विनीत हास
फैला प्रकाश
दीपित हुआ
पदक
तुमने छुआ !
तुम चलीं
चलकर आईं
और गले लगाईं
विजेता को
विजित कौन हुआ ?
कोटि-कोटि साधुवाद
सहस्रकोटि आशीर्वाद
मौन
मुखर हुआ !
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