तरावट
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बानगी
एक क्लिक की बदौलत !
खास तुम्हारे लिए
विसंवादी
मुदा देख रहा हूँ
धूप तुम्हारे साथ है
तरावट (कविता-संग्रह)
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रविवार, 29 जुलाई 2018
इतना
चमका चाँद
नग हीरे का
बादल की अँगूठी में
किसी ने तो कहा है
क़बूल है
क़बूल है
क़बूल है !
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