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मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026

एक सच


चित्र यूट्यूब से साभार 


 एक सच

अर्थात् आज फिर जीने की तमन्ना है


सात साल चार दिन पहले की बात है

फ़िरोज़ी रंग का  हो गया था असमान 

रंग आँचल का लेकर उधार

रास्ता वही था, मगर

सपने हौसले आस भरोस 

टँक गए आसमान में

तारे फ़िरोज़ी

वहीदा रहमान की आँखें 

झूठ नहीं बोलतीं -

"फूल ही फूल

ज़िन्दगी बहार है

तय कर लिया"

न हो यक़ीं 

ख़ुद देख-सुन लें आप

वहीदा रहमान की आँखें

कभी झूठ नहीं बोलतीं -

"कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना"

"सच हुए सपने तेरे झूम ले ओ मन मेरे"

"भँवरा बड़ा नादान है"

"नदी नारे न जाओ शाम"

करना पड़ता है एहतेराम !


जीवन में 

सच भरे क्षण

चाहता है मन 

राज़ बार-बार खोलतीं

कभी झूठ नहीं बोलतीं

वहीदा रहमान की आँखें !


रास्ता कोई भी हो 

तुम चलो तो सही ।

                               २७१०२०२६

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