चित्र यूट्यूब से साभार
एक सच
अर्थात् आज फिर जीने की तमन्ना है
सात साल चार दिन पहले की बात है
फ़िरोज़ी रंग का हो गया था असमान
रंग आँचल का लेकर उधार
रास्ता वही था, मगर
सपने हौसले आस भरोस
टँक गए आसमान में
तारे फ़िरोज़ी
वहीदा रहमान की आँखें
झूठ नहीं बोलतीं -
"फूल ही फूल
ज़िन्दगी बहार है
तय कर लिया"
न हो यक़ीं
ख़ुद देख-सुन लें आप
वहीदा रहमान की आँखें
कभी झूठ नहीं बोलतीं -
"कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना"
"सच हुए सपने तेरे झूम ले ओ मन मेरे"
"भँवरा बड़ा नादान है"
"नदी नारे न जाओ शाम"
करना पड़ता है एहतेराम !
जीवन में
सच भरे क्षण
चाहता है मन
राज़ बार-बार खोलतीं
कभी झूठ नहीं बोलतीं
वहीदा रहमान की आँखें !
रास्ता कोई भी हो
तुम चलो तो सही ।
२७१०२०२६
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