गुरुवार, 16 जुलाई 2026

साधो-माधो-बतकही : ५ दू सौ एगारह


 

साधो-माधो-बतकही : ५

दू सौ एगारह


माधो सुने कि नहीं ?

क्या?

वही कॉलेज वाली बात । एक ही दिन में दू सौ एगारह,यानी कि हिन्‍दी में दो सौ ग्यारह, कॉलेज खोल दिया गया है । शिक्षा पर इतना ध्यान ! आजादी के बाद तो पहली बार ही हुआ होगा ।

हाँ, मतलब आपकी शिक्षा आपके द्वार । शिक्षा सेवा है, शिक्षा के प्रदाता हैं, शिक्षा के गाहक हैं ।

देखो कितना आसान हो जाएगा सबकुछ । स्कूल से निकले नहीं कि कॉलेज में घुस गए । और कॉलेज से निकले नहीं कि यूनिवर्सिटी में घुस गए । दो-चार साल में यूनिवर्सिटी भी खुल ही जाएगा हर जगह । शिक्षा का विकेन्‍द्रीकरण । लोकतंत्र तो यही चाहता है । कॉमन मैन के हाथों में पावर !

अब विकेन्‍द्रीकरण होगा कि विनिवेश, देखा जाएगा ।  ग्यारह सौ अठ्ठासी में दो सौ ग्यारह जोड़े तो हुआ तेरह सौ निन्यानबे। यानी इतने महाविद्यालय हो गए । भाई, पढ़ाई तो पहले से ही माशाअल्ला है । बात यह है कि ब्लॉक से आगे बढ़ने नहीं देना है। ब्लॉक में ही ब्लॉक करो । वैसे भी पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ...। जग को मुअने नहीं देना है ! अच्छा, मानो पढ़-लिख गया सबलोग, तो क्या हो जाएगा ? सबको नौकरी, रोजगार-धंधा-पानी का इंतजाम हो जाएगा?

ऊँह ! उम्मीद तो जगी रहेगी न कम-से-कम । मनोज तिवारी जी का कितना पुराना गीत है, शूल फिल्म में सुनाई पड़ा था – “ एमए में लेके एडमिशन कम्पीटीशन देता...” । वैसे भी एक चरे जा चुके प्रदेश में लोगों को ज्यादा कल्पनाशील होना पड़ता है । स्कोप निकालने से न निकलता है ! देखो, कॉलेज खुले हैं । फिर बहाली होगी । ट्रांसफर-पोस्टिंग होगी । वेतन-पेंशन बनेगा । कितना स्कोप है, देख रहे हो ! है तो यह एकदम विजनरी आइडिया ।

आइडिया तो विजनरी होता ही है । सुने हैं कि एक बार कहीं चरवाहा विद्यालय भी खोले गए थे ।

भाई, तुम बड़ा निराशावादी आदमी हो । किसके करने से दिन कब पलटी मार दे, कौन जानता है । भरोसा रखो मन में । मंदिर में दीया-बाती जारी रखो । बच्चन जी कहे हैं न “ मन का हो तो अच्छा, न हो तो और अच्छा” । दोनों तरह का लोग खुश रह सकता है इसमें ।

भइया, आपको प्रणाम है । आपसे कोई नहीं जीत सकता है । 

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