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शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025

कुछ भोजपुरी में

 


कुछ भोजपुरी में  

 

 

 

       (१)


हिरना भागल जा ता हो
कस्तूरी मिलते नइखे

केतनो जोर लगाव हो
बोझवा त हिलते नइखे

कइसन तोर निसाना हो
गोटिया त पिलते नइखे

खाली सुतले-सुतला हो
घसवो ले छिलते नइखे

पनिया केतना डलब हो
फुलवा सन खिलते नइखे

घाव दरद बड़ देता हो
कोनो ऊ सिलते नइखे

 

          (२)

चैत के महिनवा हे रामा

कइसे बीते दिनवा

माने नहि मनवा हे रामा

करे का जतनवा

 

साँझ परत रोवत

दिने-दिन ही खोवत

सोचत रहत काहे

न निकसे परनवा हे रामा

चैत के महिनवा

 

करत रहत काहे

जे मन ना चाहे

दौरत भागत का

जोरे तु समनवा हे रामा

चैत के महिनवा

 

    (३)

चैत के महीनवा में

देह के दरदवा

मन के दरदवा से

कम नइखे रामा

 

के ले के जाई हमरा

के ले के आई हो

मन ओझरायल, कोनो

कम नइखे रामा

 

नीमवा के फलवा से

खूनवा त होला साफ

मनवा के साफ करी ?

तम नइखे रामा

 

दूसरा के का कहीं

अपने थकल बानी

अपना से होई का

भरम नइखे रामा

 

सोचले त का रहीं

करले त बानी का

मन कठुआइल, कोनो

कम नइखे रामा

 

उमरिया पे मत जा

डगरिया पे मत जा

केहु कहले होइ

हम नइखे रामा

 

जीते के बा, जीतऽ खुद के

लड़े के बा, लड़ऽ खुद से

औरो कोनो गत के

करम नइखे रामा

 

    (४)

बेलिया के फूलवा से

मनवा न महके

मनवा त महके

बतिया से तोहरे

 

बेलिया के का हऽ

मुरझा जाला

मनवा त रहे ताजा

बतिया से तोहरे

 

बेलिया के देख- देख

बेलिया के छू के

जइसे सुन लेनीं

बतिया के तोहरे

 

बेलिया के खुसबू

साँसे-साँसे घुल के

जइसे बइठे संगे, सुने

बतिया के तोहरे

 

बेलिया के रख के

पन्‍नवा के बीच में

रख लेनी मन में जइसे

बतिया के तोहरे

 

 (५)

उठलो बानी

सुतलो बानी

करतानी का ?

 

बुतलो बानी

जरलो बानी

मन बा कहाँ ?

 

कहलो बानी

सुनलो बानी

के सुनऽ ता ?

 

भितरो बानी

बहरो बानी

धुकेधुक बा

 

करलो रहनी

मरलो रहनी

का जानी का ?

 

रुसलो रहनी

हँसलो रहनी

उ दिनवा कहाँ ?

 

  (६)

बात पुरान

घात पुरान

कर दीं छमा

जाय दीं ना !

 

उनकर भाग

गुस्सा आग

बुझा लीं ना

जाय दीं ना

 

कोनो दाग

कोनो राग

केकरो ना

जाय दीं ना

 

मन के फाँस

इ जरल साँस

केहु के ना

जाय दीं ना

 

खुस रहीं ना

चुप रहीं ना

के मानी ना ?

जाय दीं ना

 

  (७)

त चले के बा

अब जाए के बा

दुनिया ओहि बाटे

ह रस्ता नया

सोचे के नइखे

ढेर झुके के नइखे

तनि खोए के बा

तनि पाए के बा

 

का केहु साथ आई

के साथे भात खाई

सोचे के नइखे, इ ना

गाए के बा

 

जे बाटे काम देख

जाए के धाम देखऽ

चलबकहाँ से, कहँवा

जाए के बा

 

छोड़े से छूटी ना

तोड़े से टूटी ना

मन में जुगा के सब, अब

जाए के बा

 

मन ले के , मान ले के

पूरा धन- धान ले के

बदले में हाथ जोड़े

जाए के बा

 

    (८)

बीतें जल्दी दिनवा हे रामा

कि लागे नाहि मनवा

 

देस-बिदेस के छूटल ठिकनवा

का होइ काहे बिचलित परनवा

रामे भरोसे, रामे सहारे

सब जिए के समनवा

सब जिए के समनवा हे रामा

बीते जल्दी दिनवा

 

रोग-बियोग से बचें सब कइसे

बँध-बँध के कुछो रचें अब कइसे

रामे कराए, रामे बचाए

सबे राते दिनवा हे रामा

कि लागे नाहि मनवा

 

भोर भए जेहि टूटल सपनवा

साँझ परत सेहि खोजे उ मनवा

रामे दिखाए, रामे पुराए

का सोचे के करनवा हे रामा

का सोचे के करनवा

 

पंछी डोलें, बोले कोयलिया

सूना परल सब सहर के गलियाँ

रामे भराए, खाली कराए

फिर भरे रे अँगनवा हे रामा

भरे रे अँगनवा

 

     (९)

कौनो जुगत से, कौनो जतन से

जिया नहीं माने हे रामा

जिया नहीं माने

 

झूठ बने सच, सच बने झूठा

ई दुनिया के रीत अनूठा

करे सब बहाने हे रामा

जिया नहीं माने

 

एक दूसर के केहू न माने

अपनेहू के भी तो ना जाने

खुदे के बखाने हे रामा

जिया नहीं माने

 

नियम तोड़ें उ करें मनमानी

समझें अपना के ढेरे ज्ञानी

मूढ़े के माने हे रामा

जिया नहीं माने

 

जे आँधर बनें मोह के मारे

भल मोह से उनका के उबारे

के बिधि उपराने हे रामा

जिया नहीं माने


(१०)

 बेड़ा पार लगा दीं मैया

सब सुख-दुख बिसरा दीं मैया

मन भरमावल फिरऽ ता सगरे

मन के भरम मिटा दीं मैया

 

ना सरीफ जे खाली ऐंठे

बड़ ऊ ना जे खाली बैठे

हाथ से अपना काम करे में

मन के सरम मिटा दीं मैया


    (११)

कहल नइखे जात, सहल नइखे जात

एतना डरा के रहल नइखे जात

 

देस के हालत देखल नइखे जात

हमरा से अँखिया मुँदल नइखे जात

 

साहब आ हाकिम जिए नइखे देत

हमरा से रोजे मुअल नइखे जात

 

मनवा के डर कहऽ कब ले डरइबऽ

रुकल नइखे जात, चलल नइखे जात

 

ऊपर वाला देखत काहे नइखे

सूतल बा कइसन जगल नइखे जात

 

कइला से होला, बूझत नइखे का

ई बुझियो के जे बुझल नइखे जात

 

ऊ खानी हमरा उठल नइखे जात

उठला के खातिर गिरल नइखे जात

 

     (१२)

खिंचत बानी गाड़ी खिंचत बानी हो

जिनगी के गाड़ी खिंचत बानी हो

 

दगवा ई कोनो करम से न जाए

कपड़ा हम रोजे  फिंचत बानी हो

 

का कहीं सगरे सुखाड़े सुखाड़ बा

मनवा के कइसे सिंचत बानी हो

 

ओझरा गइल चदरिया लागल खोंच

हम बइठल अकेला सिअत बानी हो

 

जिअला के खातिर मूअत बानी हो

मूअले के खातिर जिअत बानी हो

 

    (१३)

होली कइसन बिदेस में

होली कइसे बिदेस में

अरे मन अँकुसल देस में

 

ऊ टोली मोहल्ला के

रे ऊ हल्ला गुल्ला के

न मजा भूलल बिदेस में

 

मनवा सुखल मुरझा गइल

पूआ बड़ा सपना भइल

खाना खा तानि मेस में        २१०३२०२३


    (१४)

फागुन चढ़े द

निरगुन पढ़े द

मन के करे द

 

दुख बा, हँसे द

भितरे भरे द

 

फूले फले द

मनवा  फरे द

 

हरि के हेरऽ

हरि के हरे द

 

तहरा बा का

उनका डरे द

 

जिनकर बा मन

उनका चरे द

 

फागुन-रँगल-

रमले धरे द         ०२०३२२

 

(१५)

बैगन के पकला के

खुसबू भरल

लिट्टी मिली

कि रोटी सतुआ भरल

 

पीजा बा बरगर बा

औरि मोमो

रह जा ला इहवाँ

एहिंगे धरल

 

कहत रहलें बाबूजी

ध्यान धरे

चाही काम आपन

समय पर करल

 

दिने-दिन हो तानी

उनके लेखा

खोजेनी बेटवा के

साँझ ढरल             

 

समझेनी बूझेनी

तबहुँ काहे

सोना के हिरना के

पीछे परल           २१.०३.२०२२

 

      (१६)

जिंदा रहीं त का बा जे मर जाईं हम त का

दुनिया बा चुऽपे से गुजर जाईं हम त का

 

बानी हम कोन चीज आगे जमाना के

सपना हईं इहाँ जे बिखर जाईं हम त का

 

के बा जे खोजsता हमरा के अब उहाँ

साँझ हो गइल बा लौटि के घर जाईं हम त का

 

दिल के लगल त साथ रही ई भर उमिर

दरिया बा गम के पार कर जाईं हम त का

 

 

[ ज़िंदा रहें तो क्या है जो मर जाएँ हम तो क्या

 

दुनिया से ख़ामुशी से गुज़र जाएँ हम तो क्या

 

हस्ती ही अपनी क्या है ज़माने के सामने

 

इक ख़्वाब हैं जहाँ में बिखर जाएँ हम तो क्या

 

अब कौन मुंतज़िर है हमारे लिए वहाँ

 

शाम आ गई है लौट के घर जाएँ हम तो क्या

 

दिल की ख़लिश तो साथ रहेगी तमाम उम्र

 

दरिया-ए-ग़म के पार उतर जाएँ हम तो क्या  -- मुनीर नियाज़ी ]

 

      (१७)

 

देखीं,कइसन कइसन राजा ,कइसन कइसन मेठ

भितरि जे जेतना भिखमंगा,उहे कहावे सेठ

जो गी रा सा रा रा रा

 

कुछ पइला से मन ना लागे,कइसन राग- बिराग

भरल जवानी बूढ़ भइल बा,ठंढाइल बा आग

जो गी रा सा रा रा रा

 

हम बोलीं तहरा तू बोलs हमरे मनवा चोर

रोजे रोजे गल्ती होला,रोज पराला भोर

जो गी रा सा रा रा रा

 

केकरा के हम संघी कहीं, केकरा बामपंथि

खाली लेके बइठल बाड़ें, आपन आपन ग्रंथि

जो गी रा सा रा रा रा

 

मूस मुटइहें लोढ़ा बनिहें, फिर भी रहिहें मूस

कतनो खुस हो जाई तब्बो, परजा घासे-फूस

जो गी रा सा रा रा रा

 

काम करावे खातिर देखीं,सब रस्ता बा सेट

दाम चुकाईं मेवा पाईं,जइसन सुतरे रेट

जो गी रा सा रा रा रा

 

जे ना बूझे ऊहे बोले,खूब अलापे राग

कोयल बन बइठल मुस्कावे,मुँहवा खोले काग

जो गी रा सा रा रा रा

 

सोझ के मुँह त कुतवो चाटे, रहे टेढ़ से सोझ

दुनिया चाँपल चाहे देके,माथे भर-भर बोझ

जो गी रा सा रा रा रा

 

हाथ जोर जे करे निहोरा,बोली बोले मीठ

काम पुरे पर देखीं ओही,कतना बड़का ढीठ

जो गी रा सा रा रा रा                                                      २०२२

  

   (१८)

 ए दोस, का कहीं

मन नइखे लागत

मन नइखे लागत

मन नइखे लागत

 

नींद के ठिकान ना

रात के बिहान ना

रस्ता देखा पाइ

केहू बतला पाइ

और कुछो हो पाइ

कुछो ई गुमान ना

अइसहि घुमत बानि

मन नइखे लागत

 

उमरिया त रुके ना

डगरिया त रुके ना

कुले जना भाग ता

कुले मना भाग ता

इ बतिया त रुके ना

हमहुँ दौरत बानि

मन नइखे लागत

 

सभे लोग दीन बा

सेवे में लीन बा

कोनो मालिक भइल

कोनो सेवक भइल

कुछो ना एक भइल

इहे गोरमीन बा

बुझत-झींकत बानि

मन नइखे लागत

 

आपन औकात का

अपना में बात का

आव दिखावल जाव

ई समझावल जाव

मने जगावल जाव

दीया जज्बात का

कि बस सपरत बानि

मन नइखे लागत

 

रोजे ई आव ता

रोजे ऊ जाव ता

रोयलो ना समझे

देखलो ना समझे

जानलो ना समझे

मने के मनाव ता

भितरे झरत बानि

मन नइखे लागत              २०१९

             

     (१९)

कोयलिया गावऽ तिया

भरल रतिया

मनवा पिरावऽ तिया

भरल रतिया

 

का दुख बा दुनिया के

गा गा सुनावऽ तिया

भरल रतिया

 

का से का छूट गइल

दुखवा जगाव तिया

भरल रतिया

 

हम ना रहनी कोई

हमरा बतावऽ तिया

भरल रतिया

 

जे भितरे फाँक रहे

हमरा दिखावऽ तिया

भरल रतिया

 

सगरे सब पइसा के

खेला जनावऽ तिया

भरल रतिया                    ०८.०४.२०२३

             

   (२०)

चैत मासे सुनीं

बोलेली कोयलिया

न जाने न जाने

न जाने मोरा पिया

 

काहे कित छूटल

जे साथी-संघतिया

न जाने न जाने

न जाने मोरा जिया

 

बाहर सगरे जे

कुल रंग-बिरंगा

बस मनवे जइसे

भारी कारी रतिया

 

होला दुख गाढ़ा

चाही पातर करि के

जरा-जरा पिअला

जे दुखे नहीं छतिया

 

दू दिन रहनीं हम

कि अब चार दिना इहाँ

केहू  ना   पूछी

हम जानेली  बतिया

 

जे साँसे-साँसे

जहर घुलल बा हे

पुरबा चले कि अब

चले रे कती पछिया

 

घड़ी बेर बइठल

आती जाती बेला

सुख के दिनवा के

साखी टाटी झरिया                     २९.०३.२०२४


   (२१)

 भोरे भोर देखीं कि

बोलेली कोयलिया

बोलेली कोयलिया हो रामा

कहाँ आवे निंदिया

 

बिसरायल रहे, रहे

जिनकरे रे निसनिया

जिनकरे रे निसनिया हो रामा

याद उनकरे बतिया

 

धूल परल दरपन सब

लागे धुँधला अँखिया

लागे धुँधला अँखिया हो रामा

काहे अँखिये पनिया

 

जे बीतल बीत गइल

बदले रोजे दुनिया

बदले रोजे दुनिया हो रामा

दुखे न दीहिं कंठिया                      ०२.०४.२०२४

              

    (२२)

 मत झारऽ टिकोरवा हो रामा

रहे द पेड़वे में

भरल अँखियो में हो रामा

रहे द डेरवे में

 

आँधी आई पानी आई

सँग टिकोरा के सपनो झर जाई

मत तूड़ऽ सपनवा हो रामा

कि सजे द घरवे में

 

घेरवा टूटी डेरवा छूटी

मोह के सगरे धागा टूटी

कि बाँधीं एगो धगिया हो रामा

मने के पेड़वे में                             १४.०४.२०२४

     

    (२३)

 नाला कुल साफ रहे

बीस बरीस  पहले

जे माछ  मलाह  रहे

बीस बरीस पहले

 

चकचक सीसा जइसन

उपरो   से   देखीं   सन

पइसा   झलकात   रहे

बीस बरीस पहले

 

कम भइल ऑक्सीजन

मर जालीं  मछली सन

अइसन  ना  बात   रहे

बीस बरीस पहले

 

जमुना-रच्छक  हमनीं

दिल्ली  आइल  रहनीं

मछरी    भेंटात     रहे

बीस बरीस पहले

 

कूड़ा करकट   फेकल

कइसे जाला    देखल

     कार-धार    रहे

बीस बरीस पहले

 

बड़का  जहाज   आई

नदी  के  परान   जाई

सब न लोभ-लाभ रहे

बीस बरीस पहले

 

एगो    परम्परा    

जिए के  आसरा ह 

शान  से   मलाह   रहे

बीस बरीस पहले           १०.०१.२०२५

 

     (२४)

दुनिया  बा    कुम्भ   के   मेला

भीड़े     भड़क्का      रेले    रेला

 

मेलवे     में      हेरायल     बानी

का   जानी   ओझरायल    बानी

मनवा    पिरावे      रोजे     रोजे

रोजे      रोजे      रोजे    झमेला

 

एके   दुनिया   प्रेम   के   दुनिया

एके    बानी     प्रेम    के    बानी

जानेनी       समझौलो    बानी

कौनो   केकरो     कहाँ    सुनेला

 

गोदना    ताबीज     मिलौला   से

ना   उपरे  उपर    झमकौला   से

मन  के  रस्ता    अलग  बा   भाई

मन   खाली   मनवे    से   चुनेला

 

आपन  आपन  कइल  देखीं  सन

का  से  का  बा  भइल  देखीं सन

जेतना    भितरे     बा    कठिनाई

बहिरा    ओतने    दिनो     दुहेला                २८.०१.२०२५

    (२५)

बगुलवा खोऽजता देखीं

बगुलवा बौऽखता देखीं      

निसाना पाका बाऽ कि ना

निसाना साऽधता देखीं

 

इहे कुल बाऽत बा देखीं

फिकिर दिन राऽत बा देखीं

दरद के जानेला जन के

खुदे के हाँऽकता देखीं     ३०.११.२०२५

    (२६)

 अगहन बीते मनवा रीते

बरसऽता मन चाँद सरीखे

के देखी बा का मन के भीते

दुखवा कहीं त

कहीं हम कइसे

अगहन बीते...


का चाहीं जानि अउरि का माँगीं

मनवा के जाने कतना धाँगीं

डेगे डेगे सपनेहि रूआँ गिरऽता

सपना के बाँधीं

गहीं हम कइसे

अगहन बीते...                     ०४.१२.२०२५


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