तरावट
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बानगी
एक क्लिक की बदौलत !
खास तुम्हारे लिए
विसंवादी
मुदा देख रहा हूँ
धूप तुम्हारे साथ है
तरावट (कविता-संग्रह)
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शुक्रवार, 20 जून 2025
ज़िंदगी
ज़िंदगी
दबी-दबी ज़ुबान
झुकी हुई गर्दन
भीख माँगती आँखें
जिसकी तलाश थी
,
ये वो ज़िंदगी नहीं है!
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