तरावट
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बानगी
एक क्लिक की बदौलत !
खास तुम्हारे लिए
विसंवादी
मुदा देख रहा हूँ
धूप तुम्हारे साथ है
तरावट (कविता-संग्रह)
▼
मंगलवार, 15 अक्टूबर 2019
लगने को
तो
एक
स्वांग भर
लग सकता है
यह
दृष्टि पर
निर्भर है,मगर
देवी
कभी
मुस्काती होंगी
तो
ऐसे ही
मुस्काती होंगी
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