तरावट
पेज
(यहां ले जाएं ...)
बानगी
एक क्लिक की बदौलत !
खास तुम्हारे लिए
विसंवादी
मुदा देख रहा हूँ
धूप तुम्हारे साथ है
तरावट (कविता-संग्रह)
▼
मंगलवार, 10 सितंबर 2019
Resemblance
तब भी थी
अब भी है
अदा
निगाहे-नाज़ की
पुर-सोज़ भी
पुर-साज़ भी...
मेरी
तुम्हारी
उसकी, शायद
हमदर्द भी
हमराज़ भी...
खो चुके-से
मानी, सारे
अल्फ़ाज़ भी
आवाज़ भी
गो टँकी- सी रह गई
इक अदा
निगाहे- नाज़ की !
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें